बीज-बम टेक्निक से हरे भरे होंगे पहाड़, रुकेगा भूस्खलन

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वन विभाग उन दुर्गम चट्टानी क्षेत्रों पर भी पेड़-पौधे उगाने की तैयारी में है, जहां वनकर्मियों का पहुंचना मुश्किल होता है। ऐसी जगहों पर ड्रोन के माध्यम से बीज बम गिराए जाएंगे।

यह काम मानसून की पहली फुहार के साथ शुरू हो जाएगा। योजना पर वन अनुसंधान केंद्र ने 2021 से प्रयास शुरू कर दिए थे। वन अनुसंधान केन्द्र ने 10 लाख रुपये में एक विशेष तरह का ड्रोन खरीदा है। इस ड्रोन से पिथौरागढ़ और चमोली जिले के चिह्नित दुर्गम, चट्टानी क्षेत्रों में बीज बम गिराए जाएंगे। पौधे उगने से उस इलाके में भू-कटाव रुकेगा।

ऐसे होंगे बीज बम
जिन दुर्गम क्षेत्रों को पेड़-पौधे लगाने के लिए चिन्हित किया गया है वहां के स्थानीय बीज को जुटाया जाएगा। इसके बाद बीज के उगने के लिए जरूरी पोषक तत्वों को लेकर बाल तैयार की जाएगी। बाल में बीज को डाला जाएगा जिसे सीड बाल या फिर | बीज कहते हैं। इसे निर्धारित जगह पर ड्रोन की मदद से गिराया जाएगा।

अभी तक इन दो तरीकों से होता था पौधरोपण
वन विभाग दो तरह से पौधरोपण का काम करता है। पहली बीज बुआई विधि में खेत की तरह जमीन को तैयार कर मिश्रित प्रजाति के बीजों का छिड़काव होता है। दूसरी विधि में तैयार पौधे को जंगल में लगाना होता है। लेकिन दुर्गम, चट्टानी | इलाकों में वनकर्मियों की पहुंच नहीं होने के चलते वहां पौधरोपण नहीं हो पाता था।

वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी का कहना है कि वन अनुसंधान केंद्र की उन स्थानों पर पौधे लगाने की तैयारी है जहां वनकर्मी आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। इसमें ड्रोन व बीज बम की मदद ली जाएगी। मानसून शुरू होते ही यह कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जिससे पहाड़ों पर पौधे उग सकें।

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